Saturday, May 02, 2026

दिख जाना

 आज वह फिर दिखी,

 थोड़ी-थोड़ी,

 ज्यादा नहीं, 

रौशनी बिखेरती हुई 

 शाम का वक्त,

 कोई आम शाम नहीं,

 बारिश से नहाया हुआ, 

ठंडी बयार का बहना , 

आसमान जितना साफ हो सकता था 

उससे ज्यादा साफ था। 

ऐसे में 

वर्षों बाद फिर दिख जाना 

मन को तसल्ली और प्रेम से भर गया। 

"आज वह फिर दिखी" से अभीप्राय है 

अक्सर वह दिखती नहीं 

लेकिन ऐसे ही किसी शाम में 

आख़िरी बार दिखी थी, 

जब मन प्रसन्नचित था,

 मौसम ऐसा था जिसे याद किया जा सके। 

दिनभर का थकान 

किसी क्षण गायब हुआ था, 

सूर्य की लालिमा 

आसमान को रंगीन किए जा रही थी, 

ऐसे में टिमटिमाती हुई 

उसका दिख जाना 

मेरे लिए सुखप्रद था, 

मन और धरती पर

 कोई बोझ नहीं रह गया था

 उस शाम।

#prashantsamajik 


( वैशाख की असहनीय गर्मी के बाद पूर्णिमा के एक शाम पहले भरी बारिश का होना और अगले शाम घास पर एक भगजोगनी का दिखना )

Popular on this Blog